LAW'S VERDICT

भ्रष्ट आचरण पर गई पार्षद की कुर्सी, अब होगा दोबारा चुनाव


अब नगर परिषद नागौद के वार्ड नंबर 13 की जनता दोबारा चुनेगी अपना पार्षद

सतना | नगर परिषद नागौद के वार्ड नंबर 13 से जुड़ा चुनावी विवाद आखिरकार उच्च न्यायालय के फैसले के साथ निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने चुनाव न्यायाधिकरण सतना के 22 अगस्त 2025 के उस आदेश में आंशिक संशोधन किया है, जिसमें उपविजेता प्रत्याशी मो. नफीस को निर्वाचित घोषित किया गया था। अदालत ने वार्ड नंबर 13 की सीट को रिक्त घोषित करते हुए संबंधित प्राधिकरण को आदेश दिया है कि चार माह के भीतर कानून के अनुसार नया चुनाव कराया जाए

नामांकन में गलत जानकारी पड़ी भारी

चुनाव न्यायाधिकरण ने यह पाया था कि निर्वाचित पार्षद मो.  सोहराब ने नामांकन पत्र और शपथपत्र में लंबित आपराधिक मामलों और आय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया। इसे भ्रष्ट आचरण मानते हुए न्यायाधिकरण ने उनका पार्षद पद पर हुए निर्वाचन निरस्त कर दिया था। साथ ही उप विजेता मो.  नफीस को विजय घोषित किया गया था। फैसले के इसी हिस्से को चुनौती देकर यह मामला मो.  सोहराब ने हाईकोर्ट में दाखिल किया था।

रनर-अप को पार्षद बनाना गलत : हाईकोर्ट

हालांकि न्यायाधिकरण ने चुनाव रद्द करने के साथ-साथ चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को पार्षद घोषित कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब चुनाव बहुकोणीय मुकाबले (7 प्रत्याशी मैदान में) का हो, तो विजयी प्रत्याशी के मत हटाने के बाद यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि मतदाता किसे वोट देते।

मतों का गणित भी बना आधार

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने चुनाव में पड़े वोटो को निर्णायक आधार माना।  कोर्ट ने कहा-  विजयी पार्षद मो. सोहराब को  337 वोट और रनर-अप मो. नफीस को 293 वोट मिले थे। अन्य प्रत्याशियों को  240 और 197 वोट मिले थे। कोर्ट ने कहा कि 337 मतों को हटाने के बाद किसी एक प्रत्याशी को विजेता घोषित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है।

आंशिक रूप से मंजूर हुई याचिका

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता मो.  सोहराब की पुनरीक्षण याचिका पर रनर-अप मो.  नफीस को पार्षद घोषित करने वाला आदेश रद्द कर दिया, जबकि मो.  सोहराब के चुनाव को निरस्त करने का फैसला बरकरार रखा। 

CIVIL REVISION NO. 918 OF 2025.

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